Wednesday, July 15, 2015

हे मिथिलाक अर्जुन

हे मिथिलाक अर्जुन
वीर छ तु धीर छ !
तरकस में तोहर
रंग बीरंगा तीर छ !
देशक उन्नत्ति में
मेहनती तोहर शरीर छ !
मुदा मिथिलाक नाम पर
तु आन्हर आ बहिर छ !
देखि दुर्दशा गामक
आँखि में कहाँ नीर छ !
चाहे मुसलमान लाला
ब्राह्मण अहीर छ !
दिल्ली मुम्बई में
मात्र तु भीड़ छ !
कलकत्ता आसाम में
बड़का तु फकीर छ !
मुदा मिथिलाक नाम पर
तु आन्हर आ बहिर छ !
:: अनुप सत्यनारायण झानुप सत्यनारायण झा ::

पईसा कउड़ी खुब कमेलऽ

पईसा कउड़ी खुब कमेलऽ
खुन पसीना खुब बहेलऽ
देश विदेश में राज करई छ
जे नञि सेहो काज करई छ
बौआ सँ तु मनिजर बनलऽ
गउँवा के तु फटिचर समझलऽ
अलफलहा भेल साहेब बड़का
बिखपद्दु अक्खनो धरी कड़का
लाखक लाख टका तु गिनलऽ
फोर बीएचके फ्लेट तु किनलऽ
मुदा दिल्ली में पोखरी कतऽ सँ किनबऽ ?
गाक्षीक आम कि मुम्बई में बिछबऽ ?
बौआ के आंगना कतऽ देखेबऽ?
बरुआ के मड़बा कतऽ बनेबऽ?
गामक घर ओहिना कनईछ
सांझ में नञि आब डिबियो जरईछ
ताला असगर लटकल छ
कुंजी कत्तऊ भटकल छ
अंगनाक तुलसी सूईख रहल छ
कुकुर बिलाईर भूईक रहल छ
घर तोहर आब पुरा चुबई छ
दुरगमनिया कोच रोज भिजई छ
साईकिलक चक्का सड़ी गेलऽ
बाबा दाई सब मरी गेलऽ
बहुत कमेलऽ बहुत कमेलऽ
बाबा दाई सब गमेलऽ
बस करऽ आब बस करऽ
गाम धरऽ आब गाम धरऽ...................!!
:: अनुप सत्यनारायण झा ::
प्रियवाक्यप्रदानेन
सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः ।
तस्मात् तदेव वक्तव्यं
वचने किं दरिद्रता॥
अर्थात :-
प्रिय वाक्य बजला (लिखला) सँ सब प्रसन्न होईत छथिन, ताञि निके बाजक (लिखक) चाही, बाजऽ (लिखऽ) में कोन दरिद्रता?
न अन्नोदकसमं दानं
न तिथि द्वादशीसमा।
न गायत्र्याः परो मन्त्रो
न मातु: परदैवतम्॥
अर्थात --
अन्न आओर जल केर समान दान नञि अछि, द्वादशीक समान तिथि नञि अछि, गायत्री सँ पईघ मंत्र नञि अछि आओर माता सँ पईघ देवता नञि अछि
हे मोदीजी, आब नञि चाही पसेंजर गाड़ी, 
दुगो दुरन्तो भी चलवादो 
नबका कारखाना कहाँ कहई छि,
रैय्याम लोहट सकरी ही खुलवादो
मिथिला सँ है कोन दुश्मनी,
एक बेर हमरो तऽ बतलादो
दरभंगा के किछ नञि देलऽ,
कम सँ कम स्मार्ट सिटी में नाम तो लिखवादो
हे मोदीजी, आब नञि चाही पसेंजर गाड़ी,
दुगो दुरन्तो भी चलवा दो
नबका कारखाना कहाँ कहई छि,
रैय्याम लोहट सकरी ही खुलवादो
बहुते घुमलऽ चीन जापान आ मंगोलिया,
आब मिथिलो में गाड़ी घुमवादो
नञि किछ तऽ अही बहाने
दरभंगा हवाई अड्डा के श्राप सँ मुक्त करवादो
हे मोदीजी, आब नञि चाही पसेंजर गाड़ी,
दुगो दुरन्तो भी चलवा दो
नबका कारखाना कहाँ कहई छि,
रैय्याम लोहट सकरी ही खुलवादो
::अनुप सत्यनारायण झा::